कभी इतिहासकार लगता है अकेलापन पुरानी यादों को परत दर परत खोद निकलता है कभी लेखक लगता है अकेलापन भावनाओं के समुंदर को गागर में समेटने की कला देता है कभी साथी लगता है अकेलापन दूर बैठे सनम से बिन बोले, बातें कर लेना सिखाता है कभी प्रशिक्षक लगता है अकेलापन कभी उधेड़बुन करते करते रफू करना सीखाता है विवसन सत्य को ढकने का प्रशिक्षण देता है दुनियादारी सिखाता है कभी वैज्ञनिक लगता है अकेलापन, गूढ रहस्यो को सुलझा, अविष्कार करता है कभी गुरु लगता है, अकेलापन अपने इतिहास से, सबक लेना सिखाता है, संस्कार देता है कभी संत लगता है अकेलापन ध्यान में डूब, अन्तरात्मा से बातें करना, परमात्मा की ओर ले आध्यात्मिक बनाता है@शीष कटारे