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Showing posts from December, 2022

Guru गोविंद सिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। देही शिवा वर मोहि ईहे शुभ कर्मण ते कबहू न टरो,अरी सो जब जाय लडूं,निश्चय कर अपनी जीत करों

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अज्ञेय

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मैंने आहुति बन देखा है -अज्ञेय  मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने ?काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है,मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने ?मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले ?मैं कब कहता हूँ प्यार करूँ तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले ?मैं कब कहता हूँ विजय करूँ मेरा ऊँचा प्रासाद बने ?या पात्र जगत की श्रद्धा की मेरी धुंधली-सी याद बने ?पथ मेरा रहे प्रशस्त सदा क्यों विकल करे यह चाह मुझे ?नेतृत्व न मेरा छिन जावे क्यों इसकी हो परवाह मुझे ?मैं प्रस्तुत हूँ चाहे मेरी मिट्टी जनपद की धूल बने-फिर उस धूली का कण-कण भी मेरा गति-रोधक शूल बने !अपने जीवन का रस देकर जिसको यत्नों से पाला है-क्या वह केवल अवसाद-मलिन झरते आँसू की माला है ?वे रोगी होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव-रस का कटु प्याला है-वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें सम्मोहन कारी हाला हैमैंने विदग्ध हो जान लिया, अन्तिम रहस्य पहचान लिया-मैंने आहुति बन कर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है !मैं कहता हूँ, म...

प्रथम CDS जनरल विपिन रावत को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि

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माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,किंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन-थाल में लाऊं सजाकर भाल मैं जब भी, कर दया स्वीकार लेना यह समर्पण।गान अर्पित, प्राण अर्पित,रक्त का कण-कण समर्पित। चाहता हूं देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूं। मांज दो तलवार को, लाओ न देरी,बांध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,शीश पर आशीष की छाया धनेरी। स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित, आयु का क्षण-क्षण समर्पित। तोड़ता हूं मोह का बंधन, क्षमा दो,गांव मेरी, द्वार-घर मेरी, आंगन, क्षमा दो, आज सीधे हाथ में तलवार दे-दो, और बाएं हाथ में ध्वज को थमा दो।सुमन अर्पित, चमन अर्पित, नीड़ का तृण-तृण समर्पित। चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूँ

शं नौ वरूण: राष्ट्रीय नौसेना दिवस की हार्दिक बधाई। 4 दिसंबर 1971 को भारतीय नौसेना के वीर सैनिकों ने ऑपरेशन trident के अंतर्गत missile बोट INS निपत, INS निर्गत और INS वीर द्वारा कराची बंदरगाह को जला कर राख कर दिया और बंदरगाह 7 दिन तक जलता रहा जिसकी लपटें 60 km दूर तुक देखी गयीं थी

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