प्रथम CDS जनरल विपिन रावत को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि
माँ तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन,किंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन-थाल में लाऊं सजाकर भाल मैं जब भी,
कर दया स्वीकार लेना यह समर्पण।गान अर्पित, प्राण अर्पित,रक्त का कण-कण समर्पित।
चाहता हूं देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूं।
मांज दो तलवार को, लाओ न देरी,बांध दो कसकर, कमर पर ढाल मेरी,भाल पर मल दो, चरण की धूल थोड़ी,शीश पर आशीष की छाया धनेरी।
स्वप्न अर्पित, प्रश्न अर्पित,
आयु का क्षण-क्षण समर्पित।
तोड़ता हूं मोह का बंधन, क्षमा दो,गांव मेरी, द्वार-घर मेरी, आंगन, क्षमा दो,
आज सीधे हाथ में तलवार दे-दो,
और बाएं हाथ में ध्वज को थमा दो।सुमन अर्पित, चमन अर्पित,
नीड़ का तृण-तृण समर्पित।
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