प्रेम में एक खोता है तो दूसरा पाता है। यही क्रम सतत चलता जाता है।। नही ये कोई इंसाफ का तराजू, जिसमे एक उठा एक झुका होता है, करके बेवफाई कुछ लोग सोने से पत्थर बन जाते हैं, आत्ममुग्धता मे खुद का पड़ला भारी समझ लेते हैं पर दूसरा तभी पारस बन जाता है। पत्थर और पारस का अंतर जिसे समझ आता है, वही सफल प्रेमी कहाता है @आशीष कटारे@