मेरे रक्त की एक एक बूँद में देशभक्ति है। इसके लिए हद से गुजर जाने की शक्ति है। देशहित में न देव दानव में करूँ अंतर, कहता मेरा मर्म है, देशहित के मार्ग में नहीं कोई वर्जना कहता ये धर्म है।। कामना है इस हेतु रक्तबीज बन जाऊं, रक्त की हर बूंद से अगणित हो अकेले ही संग्राम जीत जाऊं@, आशीष कटारे@

Comments