एक निर्बल मित्र, बलवान शत्रु से भी अधिक हानिकारक होता है, क्योकि वह आपका कभी भी साथ छोड़ देता है जबकि आप उसके भरोसे शत्रु से बचाव चाहते हों-चाणक्य।लगता है जेलेन्सकी ने भारत विरोधी होने के चलते इस उक्ति को नहीँ समझा

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