पिता, मेरे आदर्श है, मेरे नायक है।पिता अपने अनुशासन की हथौड़ी,और ज्ञान की छेनी से मुझे आकर दे, अपने मंदिर में स्थापित करने वाले, शिल्पकार है।मुझमें यदि कुछ भी विलक्षण है,तो पिता इसके पीछे पिता का आशीष है।पिता हमारे साथ साथ चलने वाले आशीष के आभामंडल है।जिनके सामने हर प्रहार विफल है,ऐसे कर्ण का कवच है पिता।मुझे जीवन संघर्ष में जिताने वाले गुरु द्रोण है।हर शत्रु के लिए परशुराम का क्रोध है।जग में किसने ईश्वर को देखा है।पिता हर कठिनाई का हलाहल पी,हमे बचाने वाले साक्षात महाकाल है।@ आशीष कटारे @स्वरचित पंक्तियां समर्पित है मेरे पिता को, पितृ दिवस के अवसर पर 🙏

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