हार भी है, जीत भी हैपीर भी है, प्रीत भी हैअनवरत इक शोर भी हैआपदा घनघोर भी हैकिन्तु अन्तस् में अमर आह्लाद जीवित हैहोलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित हैमानता हूँ उत्सवों का दौर थोड़ा कम हुआ हैआंधियों से आम्रवन का बौर थोड़ा कम हुआ हैकिन्तु कलरव ने चहकने की प्रथा त्यागी नहीं हैमांगलिक वेला अभी सब हार कर भागी नहीं हैकोयलों का आम से संवाद जीवित हैहोलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित हैदृष्टि की सीमाओं तक अनजान वीराना पड़ा हैकान के उस पार सीमाहीन सन्नाटा खड़ा हैकिन्तु हाथों पर कोई रंगीन सा एहसास भी है'पीर का भी अंत होगा' -मन में ये उल्लास भी हैमौन का आनंद अंतर्नाद जीवित हैहोलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित हैधीर टूटेगा लखन की चेतना को लुप्त पाकरमन विकल होगा प्रिय अभिमन्यु को समिधा बनाकरकिन्तु द्रोणाचल किसी संजीवनी को जन्म देगाशौर्य को अमरत्व युग-युग तक समूचा धर्म देगासत्य का यश मृत्यु के भी बाद जीवित हैहोलिका की गोद में प्रह्लाद जीवित है............. होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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