बटुकेश्वर दत्त को उनकी जयंती पर शत शत नमन @shish कटारे

 अदम्य साहस शौर्य के हस्ताक्षर हुतात्मा बटुकेश्वर दत्त को उनकी पुण्य तिथि पर शत शत नमन। "मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की वो दिल्ली जहां मैंने असेंबल में बम फेका था, वहां स्ट्रेचर पे लादकर अपाहिज की भांति लाया जाऊँगा "बटुकेश्वर दत्त। 
भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त ने स्वतंत्रता के बाद का जीवन अत्यंत गरीबी में बिताया था। ये हम कृतघ्न भारतीयों पर कलंक है की देश के सपूत ki वैसा सम्मान नहीं मिला जैसा मिलना चाहिए था। अंतिम दिनों मे उन्हें तपेदिक हो गया था।  कुछ संवेदनशील लोगों ने उन्हें अस्पताल मे भर्ती कराया जहां लंबी बीमारी के बाद 20 जुलाई 1965 को उनका निधन हुआ।

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